कुंडली में जानें गूरू का प्रभाव और कार्य
जिस घर में बैठता है उसको बिगाड़ता है, परंतु जिस भाव को देखता है उसे लाभ पहुँचाता है। गुरु शरीर की शक्ति और ज्ञानकारक तथा सुख, समृद्धि, संतान देने वाला और धर्म-अध्यात्म में रुचि बढ़ाता है। शुभ भाव में निर्दोष गुरु राजयोग बनाता है। कहा गया है 'किं कुर्वति ग्रहा सर्वे भस्म केंद्रे बृहस्पति'- केंद्रस्थ गुरु सौ दोष दूर करता है, परंतु शत्रुग्रहयुक्त, अस्त तथा शत्रु क्षेत्र में न हो।
महिला की कुंडली में गुरु की भूमिका- गुरु महिलाओं का सौभाग्यवर्द्धक तथा संतानकारक ग्रह है। जन्म कुंडली में गुरु 1/2/4/5/11/12 में शुभ फल तथा 3/6/7/8/10 में अशुभ फल देता है। स्त्रियों की कुंडली में गुरु 7वें तथा 8वें भाव को अधिक प्रभावित करता है। मकर-कुंभ का अकेला गुरु पति-पत्नी के सुख में कमी लाता है। जलतत्वीय या कन्या राशि का सप्तम का गुरु होने पर पति-पत्नी के संबंध मधुर नहीं रहते।
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