ग़ज़ल इशारों में कह कर बता दीजिएगा
गजल ------- इशारों में कह कर बता दीजिएगा यही एक मुझको सज़ा दीजिएगा अगर चाहते हैं मुझे आप दिल से नइ कोइ तोहमत लगा दीजिएगा जो वह पूछते आये गा नाम मेरा पता मेरा उसको बता दीजिएगा मैं अब सो रहा हूं ग़मों के वतन में कभी आके मुझको जगा दीजिएगा मैं समझूं ये जिंदा है मेरी मुहब्बत गले आप मुझको लगा लीजिएगा आलोक रंजन इंदौरी