वो मुलाकात हम न भूलेंगे
गज़ल नुरानी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, वो मुलाकात हम न भूलेंगे जिससे चेहरे पे ये रवानी है उनका गम हमको रूला देता है चाहतों की ये मेहरबानी है वो मुलाकात,,,,,,,, जख्म कोइ मिले मगर अब तो हमनें इंशानियत की ठानी है वो मुलाकात,,,,,,,, वो बहक जाते हैं नशे की तरह आदतें उनकी खानदानी है वो मुलातात,,,,, देर तक कब खुशी संभलती है इसकी सेहत तो आनी जानी है वो मुलाकात,,,,,, दुश्मनों तुमको मुबारक महफिल ये मेरी तुमपे मेहरबानी है वो मुलाकात,,,, बाद मरने के कौन मरता है जिंदगी की यही कहानी है वो मुलाकात,,,,,,, इश्क करके हुआ न कौन तबाह आशिकों नें ये बात मानी है वो मुलाकात,,,,,,, नज्म पढ़कर न जो संभलते हैं नज्म के साथ बेइमानी है वो मुलातात,,,,, जिंदगी हम भी जीते हैं आलोक देख लो चेहरा ये नुरानी है वो मुलाकात,,,,,,,, आलोक रंजन शास्त्री इन्दौर 9425069983