ग़ज़ल अपनें चेहरे के दाग़ तुम न दिखा पाओगे
अपनें चेहरे के दाग़ तुम न दिखा पाओगे सामनें आनें में यारा बहुत शरमाओगे अपनी बातें जो बताते हि नही तुम हमको आइना सामनें होगा तो छुपा पाओगे इश्क के आग़ में जब जलके देख लोगे तो आखिरी बार तो मुझसे हि दिल लगाओगे पूछ लेंगी तेरी सखियाँ जो उदासी सबब थोड़ा शरमाकेन मेरा नाम तो बताओगे दर्द कब तक कोइ रक्खेगा छुपाकर दिल में तुम किसी रोज़ हाले दिल को सुना जाओगे ये ग़ज़ल आपकी गाना मैं चाहता रंजन क्या मुझे गाके बस इक बार तुम सुनाओगे आलोक रंजन इन्दौरी