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आनलाइन कवि सम्मेलन

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आलोक रंजन फेसबुक प्रोफाइल पर आज शाम चार बजे कवि सम्मेलन सफल रहा अनेक साहित्यिक रचनाकारों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुये पटल पर अपनी मधुर प्रतिक्रिया ब्यक किये। कार्यक्रम का संचालन मेरठ से सु श्री उदिता शर्मा ने शानदार संचालन का कार्यभार संभाला जो बहुत ही मधुर और औचित्य पूर्ण रहा । कार्यक्रम में उदयपुर से आदरणीय प्रमिला शर्मा कानपुर से वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय गोविंद नारायण शांडिल्य जी इन्दौर मप्र से आलोक रंजन इंदौरवी जी ने काब्य पाठ करके चार चांद लगा दिया।

ग़ज़ल सब्र का बांध तोड़ते क्यूं हो

सब्र का  बांध तोड़ते   क्यूं   हो अपना ही राज खोलते क्यूं हो इस सियासत का फायदा क्या है हर सुबह कड़वा बोलते क्यूं हो *कद्र करना तो सीख लो तुम भी* फ़र्ज़  से मुंह  को मोड़ते क्यूं हो सारी  जनता निराश हैं  तुमसे  फिर भी अब हाथ जोड़ते क्यूं हो हर बुरे  वक्त में  मैं  साथ रहा साथ मेरा  ही छोड़ते  क्यूं हो धीरे चल कर के  ये सफर देखो क्या है जल्दी भी दौड़ते क्यूं हो चाहते हो क्या सीधा सीधा कहो दिल ये रंजन टटोलते क्यूं हो आलोक रंजन इंदौरवी