बिन तेरे जीवन श्रीमती रीतू राय की कविता

तुझसे विछड़कर जीने की 
सौगात लेकर क्या करूँगी
चाँद जब ना साथ हो
चाँदनी रात लेकर क्या करूँगी

विन तेरे कैसा सफर
विन तेरे कैसी डगर
विन तेरे ना है मेरा
कोई तुम सा हमसफर
आये सावन की घटा या
आये मधुमास फिर

विन तेरे इन मौसमों की बरसात लेकर क्या करूँगी
तुझसे विछड़कर जीने की सौगात लेकर क्या करूँगी

अवनि दुल्हन बनी है
ओढ़कर धानी चुनर
नीले गगन में भी 
चाँदनी का है पहर 
तुम कहाँ चले गये हो
फेर लिए क्यों नजर 
ढूढती निगाहें है 
तुमको आठो पहर 

 विन तेरे इन साँसों की रफ्तार लेकर क्या करूँगी
चाँद जब साथ ना हो चाँदनी रात लेकर क्या करूँगी
 
यादों में डेरा तेरा
उर में बसेरा तेरा
तम ही तम आसमां में
ना है सवेरा मेरा  
जोगन बनी  मै
ढूढ़ती तुझको फिरूँ
आशियाने में मेरे
ना है बसेरा तेरा


विन तेरे मै खुशियों की बारात लेकर क्या करूँगी
जिन्दगी में तू नही तो तेरा एहसास लेकर क्या करूँगी।
रीतू राय (आजमगढ़) उत्तर प्रदेश 

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