पर्यावरण दिवस पर विशेष ,,,,,,,,,,,, ये पेड़ नही मेरा भाइ है । ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, लघु कथा ,,,,, वर्षों पुरानी बात है पर्यावरण पर चर्चा हो रही थी गांव के कुछ बुद्धजीवी लोग अक्सर मेरे घर पर पिताजी के साथ राजनीति से लेकर समाज खेती बाड़ी को लेकर अपने विचारों को आदान प्रदान करते ।आज पर्यावरण की चर्चा हुइ और तय हुआ कि शास्त्र में भी आया है कि ,प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में कम से कम पांच पौधे लगाना हि चाहिये ।पिताजी ने कहा चलो पोखरे वाले खेत पर चलते हैं कुछ पौधे रोपना है ।हम दोनो तीनों भाइ फावड़ा और घर के बगल में जो गली थी ,उसमें आम के जमें हुये पौधे लेकर पोखरे पर जा पहुचे।गढ्ढा खुदाइ करके हम सबने अपने अपने हाथों से नौ पौधे लगा दिये । पानी देकर मिट्टी दबाकर चारो ओर से ऊचा करके घर आ गये । पिताजी के साथ कभी कभी हम भी पौधों को पानी देकर खुश होते । और अपने लगाये पौधे को बढता देखकर अपनेपन के भाव से मन हि मन बड़ी तृप्ति मिलती । समय बीतता रहा हम पढाइ पूरी करके नौकरी करने नागपुर आ गये । इस बीच हमारा लगाया हुआ पौधा पेड़ का रूप ले चुका था , और उसमेंं आम के फल भी आने लगे...