कहानी लघु कथा (दूसरी माँ)

दूसरी मां 
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एक लघु कथा
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प्रकाश आज घर से निकलते वक्त टिफिन बरामदे में रखे सोफे पर भूल गया पत्नी  घर के सारे काम के साथ टिफिन बनाने में प्रेम और हृदय से पति के प्रति पूरा समर्पित भाव से तल्लीन रहती है छोटी बच्ची अभी ढाइ साल की है छोटी सी गृहस्थी बड़े प्रेम से कट रही है ।पत्नी विभा घरेलू कार्य के साथ साथ सामाजिक उत्सव से लेकर पोलीटिकल भागीदारी भी लोगों के साथ उतनी हि जिमेमेदारी से निभाती है चाहे वो वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाना हो राशन कार्ड बनवाना हो विजली के बिल कम करवाना हो सबमें लोगों के साथ खड़ी रहती है बहुत कम ऐसा होता है कि घर की लक्ष्मी घर के साथ साथ सामाजिक दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाने में सक्षम हो । समाज से जुड़े रहना विभा को अच्छा लगता है यदा कदा प्रकाश पत्नी की पूरी मदद करता है ।कुल मिलाकर पति पत्नी में सामंजस्य बहुत बढिया है । एक दूसरे को संतुष्टि है अपने दांपत्य जीवन से ।आज सादी की साल गिरह है प्रकाश आफिस से आते समय विभा की पसंद के बंगाली मिठाइ लेकर आया और सुन्दर सी साड़ी । साड़ी पहनकर विभा नें पती को प्यार से बाहों में लेकर चुम्बन दिया और दोनो पास के मंदिर मे भगवान गणेश का दर्शन किये।रात को सोते समय बेटी इशा अचानक जोर जोर से रोने लगी म्मी कहकर विभा और प्रकाश दोनो जग गये । शायद कोइ सपना देखा हो इशा ने दोनो ने बेटी को गोद मे लेकर पुचकारा और पूछा बेटी क्या हुआ क्यो रो रही हो पर वह कुछ नही बोली । सुबह जल्दी उठकर प्रकाश ने बेटी रो गोद में लेकर गार्डन में टहलने चला गया गार्डन मे व्रेंच पर बैठे बेटी से पूछा बेटी रात रो क्यो रो रही थी तो बेटी ने कहा माने सपना देखा कि मम्मी को कुछ लोग पकड़कर  कही ले जा रहे हैं मै रो रही हू । हाहाहहाहा
प्रकाश हसते हुये बेटी को समझाया नही बेटा म्मी तो तुम्हारो पास हि थी और रहेगी ऐसे नही डरते तुम बहादुर बच्चे हो ।बेटी को लेकर प्रकाश घर आया तो देखा विभा विस्तर पर वेसुध पड़ी थी ये क्या हुआ कपडे़ बिखरे थे किसी अनहोनी की आसंका से प्रकाश का दिल घबराने लगा और झकझोर कर विभा को जगाने लगा पानी का छीटा देने पर कुछ होश आया तो तुरंत अस्पताल लेकर भगा ।लेकिन अस्त ताल जाते जाते विभा ने दम तोड़ दिया । किस्मत और भाग्य के आगे भला किसकी चलती है ।बेटी को गोद में लेकर आज विभा को गये एक महीने हो गये आखो मे भय और दुख को लिये प्रकाश जीवन का कोइ निर्णय नही ले पा रहा है बैठा चुपचाप उदास जैसे जीवन में कोइ रंग नही हो बेजान सा शरीर हो गया। अचानक बाहर से पड़ोस की चाची की आवाज आइ प्रकाश प्रकाश ,,,,,,कहा है वेटा कभी बाहर भी निकल जाया करो लोगों से बात करने से दुख हलका हो जाता है मन बहल जाता है नही चाची कुछ अच्छा नही लगता है क्या करूं । कुछ समझ नही आ रहा है इशा को देखकर और दुखी हो जाता हू इसने क्या बिगाड़ा था भगवान का जो इस बच्ची के सिर ले मां का साया छीन लिया फफफ,,,,,,,,रोने लगा । चाची ने सिर पर हाथ रखा और सांत्वना देकर बोली बेटा जीवन बहुत लंबा है ऐसे कैसे काटोगे ।कोइ उपाय सोचो तुम दूसरी सागी कर लो एक बच्ची को मां का सहारा मिल जायेगा और तुम्हे परिवार मेरी मानो तो सादी कर लो नही नही चाची दूसरी औरत क्या इसा को को मां की तरह रख पायेगी ? हा हा बेटा सब एक जैसे नही होते अच्छा एक बात सुनो मुझे अब याद आया मेरी एक भतीजी की बेटी है उसरे साथ बहुत भगवान ने अन्याय किया सादी के एक महीने बाद हि उसके पति ने छोड़ दिया बोलता है हमको सावली औरत नही चाहिये मै तो कहती हू बेटा तू उससे सादी कर ले तेरा भी घर बस जायेगा और उसका भी जीवन बीत जायेगा मै तेरे हाथ जोड़ती हू । नही नही चाची आप हाथ क्यो  जोड़ती  हो आप बड़ी हैं पैर छूते हुये प्रकाश झुका और चुप ताप बैठ गया चाची ने कहा मै आज हि बात करती हू तू चलकर मेरे साथ देख वे बात कर  बेटा प्राश चुपचाप बैठा रहा रुछ नही बोला जीवन के बदलके पहलू की तस्बीर लिये दुख और दुविधा का कहर छुपाये कभी खुद को कभी परिस्थिति झोकों डूबता रहा । आज रविवार आफिस की छुट्टी का दिन इसा को दूध बनाकर दिया और खुद चाय पीने लगा तभी चाची की आवाज आयी प्रकाश बेटा कहा हो हा चाची आ जाओ चाय पीलो नही बेचा चाय को पीना जहर हो गया शूगर से परेसान हू तुम पीलो बैठो चाची हा बेटा ।बेटा आज छुट्टी का दिन है चलो लडकी से मिल लो मै भी साथ चलती हू। प्रकाश कुछ न कहने की मुद्रा मे चुप चाप बैठा कुछ बोल न सका । चाची ने फिर से कहा बेटा जीवन अकेले कैसे बिताओगे सोचो दुनिया बहुत अनसुलझी पहेली है समझना मुश्किल है मैने अस्सी साल में बहुत कुछ देखा है समझा है मेरी बात मानो सादी कर लो बच्ची का मुह देखो तभी खेलती इशा बाहर सीढी से टकराकर गिर पडी़ होठोम पर चोट लगी खून बहने लगा रोते रोते मां मा चिल्लाने लगी प्रकास ने गोद में लेकर चुप कराने की कोसिस करने लगा और आंखो मे पानी की धारा बह निकली चाची भी रोने लगी 
बेटा आज तो तुझे चलना हि पडेगा मेरे साथ चल अभी समझाते हुये चाची ने कहा । कुछ नही समझ आ रहा चाची क्या करू ।बेटा मेरी बात मान लो तुम्हारे जीवन मे फिर खुशिया आ जायेगी जो बीत गया नो भूल जाओ आदमी को खुद हि रास्ता ढूढना पड़ता है तुम आगे बढोगे तो भगवान भी तुम्हारी मदद करेगा बडो की बात मान लो चलो । चाची के आग्रह को स्वीकारके हुये प्रकाश अनमने मन से तैयार हो गया बच्ची को और चाची को लेकर चल दिया 
बहा पहुचने पर परिवार को लोगो ने स्वागत किया और लड़की से मिलकर बातें करने लगा परिवार के सभी बड़े लोगो ने बड़ी आत्मियता से प्रकाश को समझाया बाबू आप सादी के लिये तैयार हो जायेगे तो दो परिवार सुखी हो जायेगे और हम सबकी दुआ आपके साथ है ।बच्ची के जीवन को लेकर ऊहापोह मन मे चलता रहा प्रकाश ने कहा मै सादी कर लूगा पर इसा को कोइ कष्ट नही होना चाहिये 
अरे बेटा हम सब तुम्हारे साथ हैं रागिनी इसा का पूरा ख्याल रखेगी मां की कमी कभी नही महसूस होने देगी 
ठीक है फिर आप लोग जैसा कहें मै तैयार हू प्रकाश ने जमीन की तरफ देखते हुये कहा । सबने खुसी से ताली बजाये और रागिनी को प्रकाश के साथ उसी समय गणेश मंदिर लेकर चलने को कहा मंदिर में भगवान के आशिर्बाद और बड़ों की शुभकामना के साथ नये जीवन की सुरूवात हो गयी इसा को रागिनी के रूप में दूसरी मां मिल गइ आज प्रकाश के जीवन में फिर एक खुशी ने दस्तक दिया और अधूरा परिवार पूरा हो गया ।

आलोकजी शास्त्री (सरस)
इन्दौर मप्र  9425069983

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