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Showing posts from January, 2021

ग़ज़ल

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मैं तुम्हें समझा करूं और तुम मुझे समझा करो छोटी छोटी बात में कोई न अब शिकवा करो जिंदगी के फूल में अनुराग है सौहार्द है साथ में रहकर मेरे तुम भी ज़रा महका करो रोशनी मिलती रहेगी गर दिलों में प्यार है नेक रस्ते पर चलोगे बस यही वादा करो इस चमन का फूल बनकर हम भी मुस्काया करें सांस के हर तार पर प्रभुनाम जप जाया करो चांदनी गुलजार कर देगी तुम्हारी राह को अपनी मंजिल की तरफ चुपचाप बढ़ जाया करो गम कोई आए अगर तो तुम खुशी से झेलना दर्द भी इक है दवा इससे न घबराया करो आसुओं के रूप में जो जल बरसता जा रहा तुम नही रंजन कभी औरों को बतलाया करो आलोक रंजन इंदौरी

ग़ज़ल

दोस्ती  के  दायरे में   नफरतों  की  बू  न  हो ये दुवा करना किसी की आंख में आंसू न हो जिंदगी के हर कदम पर प्यार ही कायम रहे इक मुहब्बत के सिवा बस कोई आरजू ना हो आशिकी करने की जुर्रत करना भी बेकार है गर तुम्हारे दिल  में कोई हुस्न की खुश्बू ना हो कौन इज्जत दे सकेगा तुमको अपने दिल में अब जब तुम्हारी सोच में उसकी ही आबरू ना हो जिंदगी जब खिलखिला हट मुस्कुराहट छीन ले और भी बढ़ जाता गम जब दोस्त का पहलू हो आलोक रंजन इंदौरी

ग़ज़ल

दोस्ती  के  दायरे में   नफरतों  की  बू  न  हो ये दुवा करना किसी की आंख में आंसू न हो जिंदगी के हर कदम पर प्यार ही कायम रहे इक मुहब्बत के सिवा बस कोई आरजू ना हो आशिकी करने की जुर्रत करना भी बेकार है गर तुम्हारे दिल  में कोई हुस्न की खुश्बू ना हो कौन इज्जत दे सकेगा तुमको अपने दिल में अब जब तुम्हारी सोच में उसकी ही आबरू ना हो जिंदगी जब खिलखिला हट मुस्कुराहट छीन ले और भी बढ़ जाता गम जब दोस्त का पहलू हो आलोक रंजन इंदौरी