ग़ज़ल

मैं तुम्हें समझा करूं और तुम मुझे समझा करो
छोटी छोटी बात में कोई न अब शिकवा करो

जिंदगी के फूल में अनुराग है सौहार्द है
साथ में रहकर मेरे तुम भी ज़रा महका करो

रोशनी मिलती रहेगी गर दिलों में प्यार है
नेक रस्ते पर चलोगे बस यही वादा करो

इस चमन का फूल बनकर हम भी मुस्काया करें
सांस के हर तार पर प्रभुनाम जप जाया करो

चांदनी गुलजार कर देगी तुम्हारी राह को
अपनी मंजिल की तरफ चुपचाप बढ़ जाया करो

गम कोई आए अगर तो तुम खुशी से झेलना
दर्द भी इक है दवा इससे न घबराया करो

आसुओं के रूप में जो जल बरसता जा रहा
तुम नही रंजन कभी औरों को बतलाया करो

आलोक रंजन इंदौरी

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