तेरे हवाले
तेरे हवाले
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वफा के नाम पर कितने बड़े घोटाले हैं
तुम्हारे शौक तो बर्बाद करने वाले हैं
मुझे ख़बर है मुझे चाहते हो तुम बहुत
इन्हीं ख़यालों में रातों को सोने वाले हैं
जख़म दिखाकर तुम याद क्यूँ दिलाते हो
इन्हीं जख्मों ने दिये मेरे दिल में छाले हैं
मैं तेरे हर ग़म का अब हिसाब रखता हूँ
तुम्हें पता है ग़म हम कितने पीने वाले हैं
नायाब ज़िन्दगी के उसूल हैं कुछ सुन लो
वफा के किस्से बहुत दर्द देने वाले हैं
तका़जा़ अब नही उनसे कभी करूँगा मैं
दिलों नें जिनके मेरे राज़ छुपा डाले हैं
वक्त की बात है किससे सिकायतें करता
हैं कुछ अफ़साने जो रंजन के हि हवाले हैं
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आलोक रंजन
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