सच्ची हँसी
सच्ची हँसी
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मेहनत जब मिट्टी से जुड़ जाती है
चेहरे पर बस ऐसी हँसी लाती है
दिखता है पूरा चेहरा चन्दा सा
अपने आप खुशी बस झलकाती है
मेहनत से,,,,,
मिट्टी से जुड़ने वाले हि जानेंगे
कठिन तपस्या है वो पहचानेंगे
जीवन तपकर कुंदन भी बन जाता है
जब हम कुछ करने की ठानेंगे
जोश होश में मस्ती छा जाती है
मेहनत जब,,,,,,,,
हर आसान मुश्किलें हो जाती
सिकवा और सिकायत धुल जाती
रस्ते हो जाते आसान सुगमता से
किस्मत की कुंजी भी देखो मिल जाती
अपने आप पहुँच जाते हैं मंजिल तक
एक आत्म विश्वास सदा लहराती है
मेहनत से,,,,,,
खाक ग़रीबी का रोना रोयेगा कौन
मखमल के ऊँचे गद्दे पर सोये कौन
घास फूस की कुटिया महल सी लगती है
रोकर करके किस्मत पर आँख भिगोये कौन
लिखकरके किस्मत अपनी चमकाती है
मेहनत,,,,,,
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