संगम तुम मेरे गीतों में आते
संगम
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गहरा नाता चंदा से है
तेरा मुझको लगता है
तेरा चेहरा चंदा जैसा
पूरा पूरा लगता है
चांदनी तेरे परितः होती
जिसमें तुम जुल्फें लहराते
तुम मेरे,,,,,,,
अंबर तुझको देख देखकर
बादल को आदेश दिया है
वर्षा की बूदों में चेहरा
पहले से भी और खिला है
भींगे होठ चुनरिया भींगी
आँचल और भीगे लिपटाते
तुम मेरे,,,,,
भींगे बदन झलकते तन में
कामद मादक बढ जाती है
जब तेरी जुल्फें चेहरे पर
अपनी गरिमा लटकाती है
सारी प्रकृति तुझे बस देखे
बिन देखे कैसे रह पाते
तुम मेरे,,,,,,
तरूणाइ है कितनी प्यारी
कदम कदम पर छाइ है
नई नवेली शुभ सगुनों में
तेरे रूप में आइ है
संगम होता तेरा मेरा
और बहुत सी होती बातें
तुम मेरे,,,,,,,
आलोक रंजन
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