भाव रस भजन
भाव रस
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चलो भक्ति का कुछ जतन ढूँढते हैं
वो माँता पिता के चरन ढूँढते हैं
बरसती रहेगी कृपा उस चमन पे
जो राधाकिशन की शरन ढूँढते हैं
जो आँखों से आँसू निकलते हैं तेरे
समर्पित तुम्हारा बदन ढूँढते हैं
ये दुनियाँ का रोना तो चलता रहेगा
इबादत का कोइ चमन ढूँढते हैं
जो आबाद है तेरे दिल में ये साँसे
चलाता है जो वो सजन ढूँढते हैं
विधाता हि सब कुछ बनाता मिटाता
चलो उसका पावन सृजन ढूँढते हैं
जो दिल को तसल्ली दिला देगी रंजन
चलो कोइ ऐसा भजन ढूँढते हैं
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आलोक रंजन
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