सावन सूना लागे

सावन सूना लागे
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कैसा सावन कैसा झूला कैसी कजली गीत रे
रिमझिम की बरसातें कैसी
कैसी मधुबन प्रीत रे
सावन के झूले सूनें हैं
सूनी मधुवन की बगिया
गोपिन के पनघट सूनें हैं

सूना है संगीत रे
रिमझिम,,,,,,,,,,,
मेले की रंगरेली सूनी
मौसम की रंगत सूनी
बारातों की चहकन सूनी
गलियां हैं सूनी सूनी
मन का गुंजन सूना लागे
सूनी है संगीत रे,,,,,,,,,,,
रिमझिम,,,,,,,,
बाजारों की रौनक सूनी
सूने  सब चौराहे हैं
चाचा की चट्टी सूनी है
सूनी सभी निगाहें है
कैसी है आपदा छिन गइ
हर चेहरे की जीत रे
रिमझिम,,,,,,,,,,
आलोक त्रिपाठी इन्दौर 9425069983

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