तुम मेरे गीतों में आते
तुम मेरे गीतों में आते ३
शायद हम तुमको लिख पाते
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
श्रद्धा की एक नाव बनाकर
हम दोनों उसमें विरजेंगे
साहस की पतवारें होंगी
पथ में अब हम नही रुकेंगे
शरणागत होकर चरणों में
प्रभु को अपनी प्रीत सुनाते
तुम मेरे गीतों,,,,,,,
बंशी की धुन पर नाचेंगे
गायेंगे गोविन्दम् वृंदम्
शीश नवाकर अपनें कर से
करते रहेगे बंदन नित्यम्
आँखों से जल बरसायेंगे
और कहेगे जगत पिता से
तुम मेरे,,,,,,,
देर रात में ध्यान करेंगे
इष्टों का आह्वान करेगे
अपनें भावों को पुष्टित कर
कुछ आदान प्रदान करेगे
नित्य हमारा नीयम होगा
हर क्षण हि बस आते जाते
तुम मेरे,,,,,,
रो रोकर स्तुति गायेंगे
श्रद्धा सुमन चढा़ देगे
जब प्रसाद देने आयेगे
अपनें हाथ बढ़ा देगे
दर्शन से निर्मल पावक में
हम दोनों निरमल हो जाते
तुम मेरे,,,,
🌺🌺🌺🌺
आलोक रंजन
Comments