चश्मे नासूर
चश्में नासूर
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मौसम है ये रंगीन मज़ा लीजिये हूजूर
गुलशन ये है नमकीन मजा लीजिये हुजूर
मौसम है,,,,
सच्चाइ भटकती है गलियों में हारकर
पागल से हो रहे हैं वो कुरते उतारकर
रंजिश में यहाँ कौन पूछता है उनका हाल
जख्मों को दबाये वो फिर रहे हैं फटे हाल
मुश्किल सी है तालीम मजा लीजिये हुजूर
मौसम है,,,,,,,
साजिश सी हो रही वतन केलिये वहाँ
गम का मखौल उड़ रहे देखो कहाँ कहाँ
भूखे गरीब सो रहे सड़कों पे देखिये
बेहाल कर रही ये तबाही तो देखिये
ख़बरे तजारीन मज़ा लीजिये हूजूर
मौसम है,,,,,,
कुरसी को बचानें के लिये बिक गये जनाब
नफरत की दिवारों पे हि अब टिक गये जनाब
जो कहते थे हम देश को आगे बढायेगे
अब तकन हुआ वो भी करके दिखायेगे
बिकने लगी ज़मीन मज़ा लीजिये हूजूर
मौसम हैं ,,,,,
मँहगाइ छू रही है यहाँ आसमान को
रोकोगे कैसे बोलो तुम इस तुफान को
खुदगर्ज हो गये हैं सियासत के सिपाही
जनता हि दे रही है उन्हें उनकी गवाही
कानून है प्राचीन मजा लीजिये हुजूर
मौसम है,,,,
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आलोक रंजन
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