वफा तुम्हारी हमारे दिल में

मेरा चांद 5
वफा तुम्हारी हमारे दिल में
चराग बनकर यूं जल रही है

तुम्हारी आंखों में मैने देखा
हमारी चाहत मचल रही है

वफा,,,,,,,
चलो जलायें दिये खुशी के
ये प्यार अब तो बसा रबों में

जनम जनम की ये आस अपनी
दिलों में कबसे बहल रही है

वफा तुम्हारी,,,,,,,
तुम्हारे नाजुक से होठ प्यारे
ये प्रेम अमृत टपक रहे हैं

तुम्हारी जुल्फों की हर अदायें
इधर उधर से बदल रही है

वफा तुम्हारी,,,,,,,,
कदम तेरे घुंघरू के स्वरों से
हृदय पटल को संदेश देते

तुम्हारे आनें की एक झलक से
हमारी नजरें अचल रही है

वफा  तुम्हारी,,,,,,,,
बदन तुम्हारा है चांद जैसा
तू चांदनी बनके आ गइ हो

मृगानयन  दूर अब जाना
ये दूरियां कबसे खल रही है

वफा तुम्हारी, ,,,,,,,,,,
तू मेरी राधा मै तेरा मोहन
ये, प्यार अपना बहुत है पावन

तेरे लिये कबसे मेरी बंशी
हृदयके उपवन में बज रही है

वफा तुम्हारी,,,,,,,,,
आलोक रंजन शास्त्री इन्दौर 9425069983

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