नज्म जि़ंदा है मेरी सायरी एक कल्पना
नज्म जिंदा है
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जो हैं, मशहूर अपनी अदा के लिये
बन गये ओ हमारे सदा के लिये
बात इतनी सी थी राह में मिल गये
कुछ सिकायत थी उनकी हमारे लिये
बात खुलती गइ नजरें मिलती गइ
दिल की धड़कन बढ़ी कुछ खता के लिये
ओ जो मशहूर ,,,,,
नज्म की रोशनी में नहाकर मिले
हमको देखा तो नज्में सुनाने लगे
इश्क का गौर परदे के पीछे छुपा
हम भी सर को हिलाये सजा के लिये
ओ जो मशहूर,,,,,,,,
खामियां कुछ न थी उनमें क्या मै कहूं
आबरू का भरम सोचकर कह दिये
हमने होठों पे अहले करम पढ़ रहे
हम भी खामोश थे इस रजा़ के लिये
ओ जो मशहूर,,,,,,,,
हुस्न जुल्फेंं बिखेरे खड़ी सामने
धड़कनें हो गइ तेज ये देखकर
नज्म काी नायिकाआज है सामने
अब तलक खुश हैं हम इस वजा के लिये
आलोकजी शास्त्री इन्दौर 9425069983
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