चांद अब इंतजार तेरा है
मेरा चांद
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चांद अब इंतजार तेरा है
मुझको लगता है अब तु मेरा है
रात जश्नें बहार लगती है
मुझको किस रोशनी ने घेरा है
चांद,,,,,,,,,
दिल को बहलानें की वजह तुम हो
इश्क का ये नया सबेरा है
चांद,,,,,,
हमनें तनहाइयों को देखा है
दिल में ये कौन राग छेड़ा है
चांद,,,,,,,,
सब्जबागी नही हकीकत है
मैनें इस आग में भी खेला है
चांद,,,,,,,
वक्त का तजुर्बा बताता है
हर तरफ मतलबी बसेरा है
चांद ,,,,,,
हम भी नादान हैं कि समझे नही
कौन दिल का मेरे लुटेरा है
चांद अब,,,,,,,
आलोक रंजन शास्त्री इन्दौर 9425069983
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