गीत कृष्ण गोपी मिलन रास प्रसंग

निर्गुण गीत 
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मुहब्बत हम भी करते हैं
वफा के सामने रोकर
संभल जाते हैं मिल जाये
अगर राहों, में कुछ ठोकर
जो गम को गर्दिशें समझे
उन्हें मंजिल कहां, मिलती
मुझे सब कुछ मिला देखो
मेरा सब कुछ यहां खोकर
सहारे ओ हमें देंगे
गलत फहमी ये मत पालो
करो कर्मों की खेती को
जियो बेफिक्र सा होकर
ये दुनियां रंग बिरंगी है
सभी चेहरे नकाबों में
मतलबी लोग मिलते हैं
यहां देखो नहा धोकर
मुहब्बत हम भी,,,,,,,,,,
आलोकजी शास्त्री इन्दौर 9425069983

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