कुंडली से जानें भूत प्रेत का साया और अवसाद की स्थिति

चंद्रमा लग्न, लग्नेश अष्टमेश पर पाप प्रभाव इन ग्रहों की पाप ग्रहों के साथ युति अथवा कुंडली में कहीं कहीं पर चंद्र की राहु-केतु के साथ युति यह दर्शाती है कि जातक पर भूत-प्रेत का प्रकोप हो सकता है।  चंद्र केतु की युति यदि लग्न में हो तथा पंचमेश और नवमेश भी राहु के साथ सप्तम भाव में है तो यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि जातक ऊपरी हवा इत्यादि से ग्रस्त होगा। फलतः उसके शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, स्वास्थ्य तथा आयु पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में प्रायः लोग मानसिक अवसाद से ग्रस्त रहते हैं। उन्हें नींद भी ठीक से नहीं आती है। एक अनजाना भय प्रति क्षण सताता रहता है। ऊपरी हवा या प्रेत बाधा भी अकारण नहीं होती। वस्तुतः ये आंतरिक और बाहय कारण जीवन में अनेक रूपों में व्यक्त होते हैं और समुचित जयोतिषीय योगों द्वारा व्यक्ति के प्रेत बाधा से ग्रस्त होने के बारे में जाना जा सकता है।
आलोकजी शास्त्री इन्दौर 9425069983 

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