गजल
इश्क आंसा नहीं
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प्यार करना कोइ खेल जैसा नही
बात आंखों से दिल में उतर जायेगी
ढूंढ लेता है ये जिंदगी की डगर
और फिर जिंदगी भी संवर जायेगी
प्यार करना,,,,,,,,
ख्वाब कितने सजाये थे हमने यहां
अब तलक उनकी मंजिल मिली हि नही
इश्क के मामले कुछ पेंचीदे से हैं
जान जाओ तो आंखें भी भर आयेगी
प्यार करना,,,,,,,
ओ वहां अपनी मस्ती में मशगूल हैं
हम जियें तो जियें कैसे बतलाइये
हर सुबह बात खत की करूं आजकल
कब तलक मेरी जानें गज़ल आयेगी
प्यार करना,,,,,,,
दर्द दिल का कहूं या कहूं फासले
बात इतनी सी है उनको दिल दे दिया
राज दिल में छुपाये फिरूं हर घड़ी
क्या पता मेरी मंजिल किधर जायेगी
प्यार करना,,,,,,,,
आंख में अश्क लेकर कोइ कह रहा
प्यार में गम जुदाइ का ओ सह रहा
देखकर हमको उसने लगाया गले
सोचकर गम की दुनियां बदल जायेगी
प्यार करना,,,,,,
कोइ आलोक दिल की दवा दीजिये
प्यार का कोइ कुछ तजरबा दीजिये
हम भी नादानियां करके देखेगे अब
मेरे दिल में भी दर्दे जिगर आयेगी
प्यार करना,,,,,,
आलोक रंजन शास्त्री इन्दौर 9425069983
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