मेरे प्रियतम आ जाना खाली है दिल का सिंहासन

मेरे चांद २
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निर्जन वन सा मेरा जीवन इसको आज सजा जाना
खाली है दिल का सिंहासन प्रियतम मेरे आ जाना
मधुर गीत मधुरस मधु ब्यंजन तेरे सम्मुख रख दूंगा
मै तो बस होठों का अमृत थोड़ा थोड़ा चख लूंगा
मै मधुमास बनूं कबतक इतना सा बतला जाना
खाली है,,,,,,,,,,,,,
नैनो की डोली में बैठी रहना सुबहो शाम प्रिये
अपनी प्यारी सी चितवन से देते रहना जाम प्रिये
प्रेमामृत की हल्की हल्की बूदें कुछ टपका जाना
खाली है,,,,,,,,,
जैसे चांद चादनी के संग और चमकता जाता है
जैसे भवरा फूलों के संग मधुर पराग सजाता है
मेरे जीवन के उपवन में अपना फूल खिला जाना
खाली है,,,,,,,,,,,,
प्रेम तपस्या साथ करेगे मिलकर बाग संवारेगे
जीवन की नइया को मिलकर संग मे पार लगायेगे
अमिट प्रेम की गौरव गाथा दुनिया को दिखला जाना
खाली है,,,,,,,,,
आलोकजी शास्त्री इन्दौर 9425069983

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