सुखमय और प्रगतिशील भविष्य का आधार



*जीवन में हम बहुतायत, इस व्यथा का वर्णन करते रहते कि हमें अवसर नहीं मिला, यथार्थ में  यह धारणा, स्वयं को कर्तव्यों से प्रथक करना या अपनी त्रुटियों  असफलताओं को छुपाने का बहाना मात्र है ईश्वर ने हमें अपार अवसरों के साथ जन्म दिया अवसर सदा हमारे सामने आते जाते रहते, अपितु हम उनको पहचान नहीं पाते या पहचानने में विलम्ब कर देते हैं, सहस्रों बार तो हम इसलिये अनदेखा कर देते हैं क्योंकि हम बड़े अवसरों की तलाश में रहते हैं, कदाचित् कोई भी अवसर छोटा या बड़ा नहीं होता क्या पता, हमारी खुशियों की मंज़िल, यही अवसर हों इसलिए हमें जीवन में परमेश्वर के दिए हर अवसर का पूर्ण सदुपयोग करना चाहिए सुखमय और प्रगतिशील भविष्य का यही आधार है।*
हरिशरणम् 

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