मर्यादा पुरुषोत्तम परम आराध्य भगवान राम

आदर्श राम
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राम मेरी आन हैं औ राम मेरी शान हैं
कंठ में घुले हुये स्वरों में मेरे राम हैं
थक न जाऊं राह में वो देखते हैं गौर से
भेजते हैं शक्ति मुझे वो तो अपनी ओर से
कंठ लड़खडा़ये न जाये बंद हो न ये जुबां
इसलिये स्वरों में सदा गूंजता ये नाम हैं
राम मेरी,,,,,,,,,,,,
संस्कृति का मोल कौन दूसरा बतायेगा
राम के बिना तो यहां कौन पूजा जायेगा
स्वल्प साधनों से कैसे कार्य हो महान सुनो
राम की महानता न कौन  गुनगुनायेगा
बैरियों को अंत समय दे दिये हैं मोक्ष धाम
ऐसे बीर कृपा सिधु करूणा निधान हैं
राम मेरी,,,,,,,,,,
देश ये पुकारता धरा सनाथ राम से
धर्म है जिवंत सदा राम के हि काम से
कर्म की उपासना की प्रेरणा मिली सदा
भावना चरित्र की पवित्र सदा राम से
जगत का प्रपंच मिटे राम की उपासना से
करके सारे कर्म सदा ये बने अकाम हैं
राम मेरी,,,,,,,,,,
भाव जगत भूल जाये राम की कृपा जो होय
कष्ट कटे दुख मिटे संत सभी गाते हैं
बेसहारों कों सदा गले लगाते मेरे राम हि
वेद और पुराण यही सर्वदा सुनाते हैं
गर्व है सनातनी परंपरा के मूलरूप
भारतीयता की एक राम हि पहचान हैं
आलोकजी शास्त्री इन्दौर 9425069983

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