मन को कैसे सहजता से वश में करें जानिये

*व्यक्ति का मन कभी भी खाली नहीं रह सकता। वह शुभ-अशुभ, कुछ ना कुछ जरूर चिन्तन करता रहता है। या तो परमात्मा का चिन्तन या फिर विषय चिन्तन करता है। ईश्वर चिन्तन से मन पवित्र होता है। जबकि विषयों के चिंतन से मन में कुविचार विकसित होते है।*
     *ज्यादा विषय भोग के चिन्तन से इन्हें प्राप्त करने की तीव्र इच्छा प्रगट हो जाती है और प्राप्त न होने पर मन अशान्त और परेशान हो जाता है। विषयोपभोग से बुद्धि जड़ हो जाती है। जड़ बुद्धि में शुभ संकल्प, शुभ विचार जन्म ले ही नहीं सकते है।*
     *मनुष्य पहले विचार करता है और अपने विवेकानुसार उसे करने की योजना बनाता है। संकल्पानुसार हाथ पैर सब करने को तैयार होते है। यहाँ से पाप और पुण्य दोनों हो सकते हैं अत: जीवन को आनन्दमय बनाने के लिए जरुरी है कि मन को ज्यादा से ज्यादा सत्कर्मों में या ईश्वर के स्मरण में लगाया जाए ताकि मन को गलत जगह पर जाने के अवसर ही प्राप्त न हों।*

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