जानिये आपकी कुंडली में मातृ दोष क्यों कैसे

ज्योतिष में माता से जुड़ा ऐसा दोष बताया गया है कि जिसकी वजह से व्यक्ति को अपनी माता का सुख नहीं मिल पाता है। इसे मातृ दोष कहा जाता है।                                                       यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्र चतुर्थ भाव का स्वामी होकर शनि, राहु या मंगल जैसे क्रूर ग्रहों से युति करता है या अशुभ है और गुरु ग्रह अकेला पंचम या नवम भाव में है तो मातृ दोष बनता है। इसकी वजह से व्यक्ति को अपनी माता से सुख नहीं मिल पाता है। अगर कुंडली के पंचम भाव में कर्क राशि हो और चंद्र अपनी राशि से 12वें भाव में हो तो भी माँ के सुख में कमी आती है। ऐसे योगों की वजह से व्यक्ति की माता का स्वास्थ्य ठीक नहीं रह पाता है। अगर चंद्र अपनी राशि से आठवें भाव में हो तब भी ऐसी स्थितियाँ बन सकती हैं। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मातृ दोष बन रहा है या माता से सुख प्राप्त नहीं हो पा रहा है तो गोदान करना चाहिए। यदि ये संभव ना हो तो गाय की सेवा करनी चाहिए। चाँदी के बर्तन में गाय का दूध भरकर दान देना चाहिए। (२) पुत्रयोग- मकर राशि का मंगल पंचम स्थान में आने पर तीन पुत्र देता है और गुरु धनु या मीन राशि के आने पर पाँच पुत्र  देता है।
हरिशरणम् 

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