आ जाओ मेरे मोहन

मेरे मोहन आ जाओ
🍀🍀🍀🍀🍀🍀

तुम्हारे इश्क में हम हो गये पागल मेरे मोहन
नजरों ने दिल को कर दिया घायल मेरे मोहन
सुहानी रात ये है चांदनी महका रही समां
कैसे करे हम अपने जजबात का वयां
वो बंशी धुन दिलों में कर रही हलचल मेरे मोहन

तुम्हारे,,,,,,,
अजब सा हाल है दिल का करार आये नही देखो
कही ऐसा न हो जाये निकल जाये ये दम देखो
तुम्हारी याद में हम खो रहे पल पल मोरे मोहन,,,,,
तुम्हारे,,,,,,,,,,
नशा  छाया है अब कोइ दवा दे दो खुमारी का
तेरे हि पास है इस मर्ज  की मारी बिचारी का
तुम्हें हि देखते हैं आंख में भर जल मेरे मोहन
तुम्हारे,,,,,,,,,,
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
आलोक रंजन शास्त्री इन्दौर

Comments

Popular posts from this blog

स्वर्ण प्रभा

प्रिये एक कविता जो केवल मेरी कल्पना है

गुरू के चरणों में प्रेम के लिये पढें नित्य गुर्वाष्टकम्