खुद को हिन्दुस्तान कहूँगा

खुद को हिन्दुस्तान कहूँगा
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मैं सरहद पर एक सिपाही बनकर ये ऐलान करूँगा
खुद को हिन्दुस्तान कहूँगा।।
दुश्मन से लड़नें की खातिर लेकर हाथों में हथियार
पत्थर जैसा टिका रहँगा मारूँगा मै शत्रु हजार
देश गर्व से खिल जायेगा ऐसा मैं तूफान करूंगा।
खुद को हिन्दुस्तान कहूँगा ।।
ललकारें भरकर सीनें में मैं दहाड़ता जाउँगा
भारत माँता के झंडे को मैं सँवारता जाऊँगा
मिट जायेगी हस्ती उसकी मैं ऐसा आह्वान करूँगा।
खुद को हिनुस्तान कहूँगा।।
आँखें जो दिखलाये हमको जाकर उसको बतला दो
अब बाँकुरी निगाहों से क्या बच पायेगा ये कह दो
आँख दिखाने वाले सुन लो तेरा घर शमशान
करूँगा।
खुद को हिन्दुस्तान कहूँगा ।।
हाथों, में है आज तिरंगा ये हमको शक्ती देता
अपनी मातृभूमि पर मिटनें की हमको भक्ती देता
लेकर आजादी का झंडा बस इसका सम्मान करूँगा।
खुद को हिन्दुस्तान कहूँगा ।।
खुद को हिन्दुस्तान कहूँगा ।।
खुद को हिन्दुस्तान कहूँगा ।।
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आलोक रंजन शास्त्री इन्दौर 9425069983

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