मेरे गोपाल हम तेरी शरण
मेरे गोपाल मै तेरी शरण
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गोपाल तुम्हारी नजरों का एक बार इशारा हो जाये
जीवन की बगिया महक उठे ये ये गुलशन प्यारा हो जाये
सुनते हैं तुम्हारी आंखों में करूणा की बूँद बरसती है
रोते हुये जीवों को तत्क्षण मुस्कान दिलाया करती है
तेरी मूरत दिल में बसती आंखों का तारा हो जाये
गोपाल तुम्हारी,,,,,,,,
इंशान कहां समझे तेरे संसार बनाने की हिकमत
सबको देते रहते हो तुम बिन माँगे तेरी है रहमत
हे देवेश्वर गोपी बल्लभ चरणों का सहारा हो जाये
गोपाल तुम्हारी,,,,,,
साकार तुम्हारी सृष्टी है भव बंधन से छुटने के लिये
मोहित होकर विस्मित इंशा जीता रहता लुटने के लिये
मझधार फंसी मेरी नइया अबआज किनारा हो जाये
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आलोक रंजन शास्त्री इन्दौर
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