जन्माष्टमी पर मेरा कान्हा रचना पढें

मेरा कान्हा
❤️❤️❤️❤️
जिसकी  रसीली दृष्टि सृष्टि में जहां भी देखो
सबके हि मन में बसा वो श्याम काला है
करता है दृष्टि तो संवर जाती जिन्दगानी
सृष्टि का प्रधान मेरा कान्हा मुरलीवाला है

कण कण समायी है उसी की शक्ति चहुओर
मन में अपार खुशी है वो आने वाला है
श्याम रंग सजता मोहक है वो लगता
यशोदा का लाल नंद बाबा का दुलारा है

मोहनी मूरति प्यारी जगसे है न्यारी देखो
गोपियों के हिरदय बसा वो रास वाला है
जग को देता है उपदेश वही गीता में
कृष्ण चन्द्र नाम है सभी को बड़ा प्यारा है
🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️
🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀

आलोक रंजन शास्त्री इन्दौर

Comments

Popular posts from this blog

स्वर्ण प्रभा

प्रिये एक कविता जो केवल मेरी कल्पना है

गुरू के चरणों में प्रेम के लिये पढें नित्य गुर्वाष्टकम्