आज फिर शाम उनकी याद आइ

शायरी
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आज फिर शाम उनकी याद आइ ।
मै हूं बस और मेरी तनहाइ ।।
होठ चुपचाप हो गये खामोश ।
जाने क्यूं आंख मेरी भर आइ ।।
सांस चलने लगी हुआ कुछ यूं।
दिल में यादों की रोशनी छायी ।।
वक्त कितना बदल भी जाता है ।
याद उनकी नही बदल पाइ ।।
इश्क के दिन भी कितने थे रंगीन।
कौन कर सकता इसकी भरपाइ ।।
शोख नजरों से देखना उनका ।
ले लिया दिल ने फिर से अंगड़ाइ ।।
देखने की अजब सी थी तरकीब ।
खिड़कियों से दिये वो दिखलाइ ।।
हम भी तनहा कहां हैं उनके वगैर ।
संग मेरे है उनकी रूशवाइ ।।
कौन किसके लिये यहां जीता ।
जिंदगी ने मुझे ये सिखलाइ ।।
हम भी पाबंद हैं अपने दिल के ।
कोइ आलोक मेरा सौदाइ ।।

आलोक त्रिपाठी (सरस)
इन्दौर मप्र 9425069983

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