मेरे महबूब 23

मेरे महबूब २३
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लौट आ जाती हैं हर बार दुवायें मेंरी
मेरी किस्मत में कितनी हैं खतायें मेरी

फँस गये आज हम जानें किस तूफान में
जान ले लेंगी इस बार फिजायें  मेरी

या खुदा कुछ तो मेरे हाल पे रहम कर दे
हर सितम से हि बचा लेंगी सदायें तेरी

दिल के हर कोनें में छाइ है बनके सुरूर
हर मेरे दर्द की बस वो हि है दवा मेरी

दोस्ती करके दग़ाबाज उसनें जाँ ले ली
उससे पूछो कि  कोइ गलती बताये मेरी

मेरे महबूब का खत आज मिला है देखो
पढ़के ये आँख जानें क्यूँ भर आये मेरी
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आलोक रंजन

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