पहचान
पहचान
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प्यार में हम झुक गये उनकी अदा के सामने
वो तो हँसकर चल दिये गैरों के दामन थामनें
मुश्किलें मेरी कि मैं कुछ और कर सकता नही
एक गहरी सी झलक है दिल के मेरी जान में
रात की तनहाइ कट जाये तो कुछ सजदा करूँ
बस गये हम आके देखो मंदिरों के गाँव में
राह के कंकड़ ज़रा सी चूक हो जाये अगर
घाव कर देते उछलकर मेरे सीधे पाँव में
बहुत मुश्किल से मिली है ये वतन की मिट्टियाँ
रास्तों में हमनें देखी कितनी जलती शाम में
बेखबर होते गये जबसे हमीं से हम यहाँ
वास्ता परमात्मा का कैसे हो इस ठाँव में
हो गये हम भी वफा के नाम पर कितने दुखी
कोइ गलती हो गइ रंजन तेरी पहचान में
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आलोक रंजन
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