माँ तुम मत घबराना प्रेमलता मिश्रा आगरा उ प्र

माँ तुम ना घबराओ
🌺🌺🌺🌺🌺🌺
रो रो के अपने ग़म को बढ़ाओ न मेरी माँ
जो बीत गया उसको भुलाओ न मेरी माँ

दुनियाँ की रीत है ये जो मिलता बिछड़ता है
इंशान जिसके  वास्ते रोता  सिसकता  है

यादों में उनकें खुद को सताओ न मेरी माँ
रो रो के अपने,,,,,,,,

कुछ पल का साथ मिलता है सबको यही है सच
किरदार निभानें के लिये  जीव है  परबस

आये थे  अकेला समझ जाओ न मेरी माँ
रो रो के,,,,,

अब अपनी हिफाजत  का ध्यान रखना जरूरी
सेहत हि करता है सभी आशाओं को पूरी

हम सब तुम्हारे साथ घबराओ न मेरी मेरी माँ
रो रो के,,,,,,,

भगवान के दरबार में सबका हि है खाता
जल्दी कोइ जाता तो कोइ देर से जाता

इस सच को अपनें दिल में बिठाओ न मेरी माँ
रो रो के अपनें,,,,,,

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प्रेम लता मिश्रा आगरा

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