माँ तुम मत घबराना प्रेमलता मिश्रा आगरा उ प्र
माँ तुम ना घबराओ
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रो रो के अपने ग़म को बढ़ाओ न मेरी माँ
जो बीत गया उसको भुलाओ न मेरी माँ
दुनियाँ की रीत है ये जो मिलता बिछड़ता है
इंशान जिसके वास्ते रोता सिसकता है
यादों में उनकें खुद को सताओ न मेरी माँ
रो रो के अपने,,,,,,,,
कुछ पल का साथ मिलता है सबको यही है सच
किरदार निभानें के लिये जीव है परबस
आये थे अकेला समझ जाओ न मेरी माँ
रो रो के,,,,,
अब अपनी हिफाजत का ध्यान रखना जरूरी
सेहत हि करता है सभी आशाओं को पूरी
हम सब तुम्हारे साथ घबराओ न मेरी मेरी माँ
रो रो के,,,,,,,
भगवान के दरबार में सबका हि है खाता
जल्दी कोइ जाता तो कोइ देर से जाता
इस सच को अपनें दिल में बिठाओ न मेरी माँ
रो रो के अपनें,,,,,,
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प्रेम लता मिश्रा आगरा
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