सुनते थे वो मशहूर हो रहा हैै
समाज का दुश्मन
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
सुनते थे वो मशहूर हो रहा है
देखा तो नशे में चूर हो रहा है
सोहरत पाकर बहके हैं कदम
ये कितना मगरूर हो रहा है
शराफत नेकी हमदर्दी कहाँ है
अपनों से भी दूर हो रहा है
इनायत हमपे क्या करता वो
कितना बेदर्द नासूर हो रहा है
पैसा खुद आता है घर उसके
अपराध करने को मजबूर हो रहा है
समझ पाता न जिंदगी अपनी
आये दिन इससे हर कसूर हो रहा है
बेचता है नशा औरत का यहाँ
कितना गंदा फितूर हो रहा है
इसको अब माफ न करना रंजन
सजाये मौत का दस्तूर हो रहा है
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
आलोक रंजन
Comments