याद करते हैं बहुत हम तुमको
दिल
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आजकल तुम उदास रहते हो
क्यूँ नहीं दिल की बात कहते हो
झूठे इल्ज़ाम लग रहे तुम पर
इतनी ज़िल्लत भला क्यूँ सहते हो
वफा बरबाद भी कर सकती है
ये उल्टी धार है इसमें क्यूँ बहते हो
इश्क़ चलता फिरता मकाँ नही है
इतना आशाँ इसे क्यूँ समझते हो
इतनी शोहरत करोगे क्या बोलो
क़ायदे मे रहो ऐसे क्यूँ भटकते हो
ज़माना साथ है तेरे करो न गम रंजन
सुना है तुम सबके दिल में रहते हो
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आलोक रंजन
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