हमारी शान है हिन्दी हमारी जान है हिन्दी आलोक रंजन शास्त्री इन्दौर
हिन्दी ग़जल
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हमारी शान है हिन्दी हमारी जान है हिन्दी
मेरा ईमान है हिन्दी मेरी पहचान है हिन्दी
चमन में फूल सब इसके वतन में हर तरफ फैले
सुभग नव गान है हिन्दी हमारी शान है हिन्दी
बहारों से कहो सज़दे में इसके कुछ करें आकर
सुधा रसपान है हिन्दी सुरीली गान है हिन्दी
नमन इसको करूँ दिल से ये मेरी माँ भी है हिन्दी
सरल आयाम है हिन्दी कोइ वरदान है हिन्दी
करें हम आरती इसकी ये वाणी है सदा मेरी
बहुत आसान है हिन्दी कड़ी ब्यायाम है मेरी
इसी की गोंद मे हम सब सदा खेले हैं खाये हैं
मेरा सम्मान है हिन्दी मेरा अभिमान है हिन्दी
न रंजन ग़म हमें अगरेजियत लगती नही अच्छी
हमारे नाम है हिंदी हमारे धाम है हिंदी
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आलोक रंजन इन्दौर
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