हम तुम्हारें है कैसे ये साबित करें

मेरे महहूब ४०
🌺🌺🌺🌺🌺
हम तुम्हारे हैं कैसे ये साबित करें
चीरकर दिल तुम्हें अब दिखायेंगे हम

आजतक जो तुम्हें यादकरके जिये
लिखके अब काग़ज़ों पर बतायेंगे हम

दर्द हमनें सहे रात दिन एक कर
अपनी तनहाइयों को सजायेगें हम

साज़ संगीत में इश्क़ की शायरी
सामनें एक महफिल लगायेंगे हम

तेरी बदनाम करनें की शाज़िश मुझे
झूठ से सारे परदे हटायेंगे  हम

दिल का है मामला ग़म मिलेगा सही
इस मुसीबत से अब दूर जायेंगे हम

एक रंजन नही है बहुत लोग हैं
साथ सबके दिलों को मिलायोंगे हम
🌺🌺🌺🌺

आलोक रंजन इन्दौर

Comments

Popular posts from this blog

स्वर्ण प्रभा

प्रिये एक कविता जो केवल मेरी कल्पना है

गुरू के चरणों में प्रेम के लिये पढें नित्य गुर्वाष्टकम्