आशा की किरण

आशा की किरण 
एक किरण आशा की आई आज फिर बरषों के बाद।
रश्मियां सज धज के आई आज फिर बरषों के बाद।।

कनक आभूषण से मंडित  चंवर  अम्बर ने  सजाये।
नयन  मूंदे  भोर  आई  आज  फिर  बरषों के बाद ।।

पत्ते - पत्ते  खिल गये  दिनकर की  छवि में ढल गये।
तितलियों की टोली आई  आज फिर बरषों के बाद।।

गुङहल ने  ज्यों  अनुबंध  खोले  मस्त ले अंगङाइयां।
सूरजमुखी भी मुसकुराई  आज फिर बरषों के बाद।।

बादलों के दल सुसज्जित व्योम आच्छादित  कलश।
प्रेम  रस  बरसाने  आई  आज  फिर बरषों के बाद।।

चादर  लपेटे  चांदनी ज्यों आकाश की  दुल्हन बनी। 
रात -रानी खिलखिलाई  आज फिर बरषों के बाद।। 

जंगल में मंगल छा गया चूजों  की खुशियाँ  देखकर।
चोंच  से  चुग्गा  खिलाई  आज  फिर बरषों के बाद।। 

अठखेलियाँ  करती  पवन  सांसों  को  सांसे  दे गई।
नूतन  नवल  संदेश  लाई  आज फिर बरषों के बाद।।
                     पुष्प लता राठौर

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