ग़ज़ल बहुत खूबसूरत डगर हो गई

बड़ी खूबसूरत डगर हो गई
मेरे दिल पेउनकी नजर हो गई

 मिले हो तो अब लग रहा है मुझे
 हमारी मोहब्बत अमर हो गई 

 हवायें उदासी की चलने लगी
 अरे जिंदगी क्यों जहर हो गई

 न जाने कहां से हवा आ गई
 समझ ही नहीं पाए कहर हो गई

 मुहब्बत से देखा जो तुमने मुझे
 मुहब्बत मेरी राहबर हो गई

 मुझे इश्क का कुछ तजुर्बा नहीं
 तेरी याद ही मुख्तसर हो गई

इरादे मेरे नेक थे जानें क्यूं फिर
ये मेरी दुआ बेअसर हो गई

निरुपमा त्रिवेदी इन्दौर मप्र

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