उसनें दिल में मुझे बसाया है

दिल में उसने मुझे बसाया है
जिसको अपनी ग़ज़ल सुनाया है

दोस्त ही है मेरा कहां फिर भी
फ़र्ज़ अपना नहीं निभाया है

आप रिश्तों की बात करते हो
मुझको तो हर कोई हमारा है

देश दुनियां में कैसी हलचल है
किसने हर सक्स को डराया है

आप  मेरे  क़रीब आ  जाओ
मैंने  हर   दर्द  आजमाया  है

रास्ता कोई   भी कहां  देता
मैंने   खुद रास्ता   बनाया है

गम है किस बात का तुम्हें रंजन
दर्द  का  गीत  गुनगुनाया  है

आलोक रंजन इंदौरवी

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